एक बार 2019 के चुनाव से पहले अमित शाह से पूछा गया था कि क्या बीजेपी लोकसभा चुनाव के लिए तैयार है? क्या उन्हें मतदाताओं का सामना करने में डर लग रहा है? अमित शाह ने तपाक से जवाब दिया था, "हमने 27 मई 2014 से ही 2019 के चुनाव की तैयारी शुरू कर दी थी।" शतरंज के शौकीन अमित शाह को हमेशा से ही रणनीति बनाकर अपने प्रतिद्वंद्वियों को मात देने में मज़ा आता रहा है। अमित शाह के काम करने का तरीक़ा उन्हें Typical नेताओं से अलग करता है। अनिर्बान गाँगुली और शिवानंद द्विवेदी अमित शाह की जीवनी 'Amit Shah and the March of BJP' में लिखते हैं, "एक बार अमेठी में जगदीशपुर के दौरे में अमित शाह ने आख़िरी मिनट पर बीजेपी कार्यकर्ताओं की बैठक बुला ली। ये बैठक वनस्पति घी बनाने वाली एक कंपनी के गोदाम में बुलाई गई थी क्योंकि उस समय वहाँ कोई दूसरी जगह उपलब्ध नहीं थी। बैठक सुबह 2 बजे तक चली। बीजेपी के स्थानीय नेताओं ने अमित शाह के ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं की थी क्योंकि वो मानकर चल रहे थे कि शाह बैठक ख़त्म होते ही लखनऊ वापस चले जाएंगे लेकिन शाह ने उस रात उसी गोदाम में रुकने का फ़ैसला किया। वो स...
दर्द और तर्क का रिश्ता क्या है इसी प्रकार एक साधु का साइंस से रिश्ता क्या है? क्या है रिश्ता एक 2 साल के बच्चे का जो अपने झोले में समान समेट रहा है, माँ पूँछती है कहाँ जाने की तैयारी है? जवाब देता है एक ऐसी सर्वोच्च पीठ की तरफ जाने का कि सुनकर यकीन न हो। फ़िर कुछ लोग पहुँचते हैं उसके सामने एक एक करके सामान सजा देते हैं, वो कुछ चुनता है कुछ फेंक देता है और उसकी जिन्दगी हमेशा के लिए बदल जाती है। लेकिन जिंदगी तो उसके मुल्क की भी बदलने वाली थी क्योंकि एक महाशक्ति के खूंखार पंजे उसकी ओर बढ़ चले थे। तो क्या हुआ वो 45 लोगों के शाश्त्रार्थ में वो निष्णात साबित हुआ, तो क्या हुआ वो करुणा के उपदेश दिया करता था, एक शाम उसे अपनी जिदंगी बचाने के लिए जिंदगी के बियाबान में कुछ यूं दाखिल होता पढ़ा कि असल में, अभिधा में कितने पहाड़, कितनी नदियाँ कितनी पहाड़ियाँ पार करीं एक उम्मीद के सहारे की वो अगर चलता जाएगा तो बुद्ध की असल ज़मीन पर पहुँचेगा और शायद जीवित पहुँचेगा। वो आता है और शरण मांगता है बुद्ध की ज़मीन से, उसे शरण मिलती फ़िर वो अपने लोगों के साथ एक बस्ती बसता है एक ऐसी जगह जहाँ का पानी दूध से भी ज्यादा मीठ...