याज्ञसेनी द्रौपदी सभी पौराणिक स्त्री पात्रों में सर्वाधिक सशक्त। पाञ्चाल की राजकुमारी जिसका जन्म यज्ञ के फ़ल स्वरूप हुआ। जिसका जन्म उसके पिता के लिए अवांछित था। जिसने अपने बचपन नहीं देखा। जिसके सखा स्वयं वासुदेव कृष्ण थे।
पहली ऐसी स्त्री जिसे अपने स्वयंवर में अपनी पसंद ना होने पर एक विजयी प्रतिभागी से विवाह करने से मना कर दिया और अपने पसंद के वर का ही चयन किया। द्रौपदी इस बात का भी प्रमाण है पुरुषों की तरह स्त्रियाँ भी बहुविवाह की अधिकारी हैं। यदि पुरुष 5 विवाह कर सकता है तो स्त्री भी। द्रौपदी ऐसी एक मात्र पौराणिक पात्र है जो कभी भी पुरुषों के सामने झुकी नहीं।
द्रौपदी जिसने अपने पतियों की अन्य पत्नियों के साथ अपनी गृहस्थी बांटने से माना किया। द्रौपदी जो पहले इंद्रप्रस्थ (आज की दिल्ली) के महारानी और फिर सम्पूर्ण भारत की सम्राज्ञी बनी। द्रौपदी जिसने 5 पतियों की भी इच्छाओं और आवश्यकताओं का ध्यान रखा।
द्रौपदी जिसे जब सम्राट युधिष्ठिर दुयुत में हार गए और उसे दासी के रूप में राज्यसभा में बुलाया गया तो उसका पहला प्रश्न था सम्राट को मुझे दाँव पर लगाने का अधिकार किसने दिया मैं उनकी को संपत्ति या राज्य नहीं। जो लोग ये नहीं समझ पाते औरत क्या चीज़ है उन्हें पहले ये समझने की जरूरत है औरत कोई चीज़ नहीं। जिसने राज्यसभा में बैठे सभी महारथियों को निरुत्तर कर दिया। जिसने महामहिम भीष्म से ये प्रश्न करने का साहस किया कि यदि मैं आपकी पुत्री होती तो क्या आप मेरा वस्त्रहरण होने देते? जिसने अपने ज्येष्ठ पिता से ये प्रश्न किया यदि मेरे श्वसुर महाराज पांडु जिनके प्रतिनिधि के रूप में आप राजा बने है वे आज राजा होते तो कुलवधू का अपमान होने देते? सभी निरुत्तर थे। जिसका वस्त्रहरण स्वयं भगवान ने रोका। जिसने यह प्रण लिया जिसने मेरा वस्त्रहरण करने का दुस्साहस किया उसकी छाती के लहू अपने केश धोये बिना मैं अपने केश नहीं बाँधूँगी। जिसने मुझे अपनी जाँघ पर बैठने को कहा उसकी जाँघ मैं तुड़वा दूंगी।
द्रौपदी जिसने अपने पतियों को वनवास के 12 वर्ष प्रत्येक क्षण अपने पतियों को अपने अपमान और उसके प्रतिशोध के लिए स्मरण कराया। द्रौपदी जिसकी सेवा में सदैव सहस्त्र दसियाँ रहती थी वो भी अज्ञातवास में 1 वर्ष विराट नगर में स्रेन्द्री के रूप में दासी बन कर रही। जिसका अपमान करने के कारण महारथी कीचक का वध हुआ।
याज्ञसेनी जिनसे मानव इतिहास का सबसे बड़ा युद्ध करवाया जिसकी कारण था यदि दुर्योधन के राज्य में 5 पांडवों की पत्नी द्रौपदी का चीरहरण हो सकता है जो बाकी सामान्य स्त्रियों की क्या दशा होगी?
द्रौपदी जिनसे युद्ध में अपने पांचों पुत्रों और भाई को खोया। द्रौपदी जो युद्ध के पश्चात भी विचलित नहीं हुई क्योंकि उसे पता था ये धर्मयुद्ध है। द्रौपदी जिसका जिस सभा में अपमान हुआ वो वहीं की सम्राज्ञी बनी।
द्रौपदी में वर्तमान स्त्री के लिए आवश्यक सभी गुण विद्यमान हैं। अतः अब समय आ गया जब इस देश के आदर्श भी परिवर्तित हों, रुठीवादितों को त्याग जाए समय की मांग के अनुसार नए आदर्शों और प्रतीकों की स्थापना हो अन्यथा वो समय अब दूर नहीं जब स्त्री अस्मिता के लिए एक और महाभारत हो सकता है।




Well written 👏👏
ReplyDelete🔥🔥
ReplyDeleteBest blog ever ....👌👌
ReplyDeleteIt's amazing n gives us strength to fight against those who always try to u look down# feminist
ReplyDelete👏👏👏
ReplyDeleteAwesome.
ReplyDelete🔥🔥💥
DeleteVah Tripathi
Best. Very well written
ReplyDeleteWell written brdr ✌🏻🔥🔥🔥
ReplyDelete