रावण बनना भी कहाँ आसान था , कहाँ आसान था अपनी बहन के अभिमान और अपने अहंकार के लिए भगवान से टक्कर लेना ! अंहकार में तो देवराज इंद्र तक ने अपनी इंद्रलोक को खोया है परन्तु महान रावण हो गया । पूरे रामायण से सिखे तो स्वंय तो श्रीराम ने विभीषण की मदद ली परन्तु बिना किसी भेद के रावण ने श्रीमन नारायण के अवतार को जान लेने के बाद भी वीरता से युद्ध किया , अस्त्र शस्त्र और प्रचंड मायावी अपितु परम शिव भक्त ।
श्रीराम ने तो वध कर दिया है रावण का त्रेतायुग में ही परन्तु रावण का अट्टहास अब भी जैसे दिमाग़ में घुम सा रहा है , अगर वो नारायण है तो उनका और मेरा नाम एक साथ लिया जायेगा और ये विश्व कीर्तिमान होगा ।
रावण अमर है !! शायद ये कथन सत्य था वरना हम आज भी हर साल रावण को जलाते नही , साल दर साल !! अब तो श्रीराम नही दिख रहे परन्तु रावण हर जगह है हमने रावण से परम ज्ञानी होना तो नही सीखा , भक्ति करना नही सीखा , अभिमान और अंहकार में फर्क नही सीखा ,जिंदादिल होकर बहादुरी से टक्कर लेना नही सीखा , हां पर झुठे अहंकर को जिंदा रखना सीख लिया , हरण करना सीख लिया , स्त्री अपमान करना सीख लिया , बिना किसी माया के छल करना सीख लिया ,लोगो का अपमान करना सीख लिया ।
मरण पश्चात हम ' श्री राम नाम सत्य है ' कहते हैं परन्तु रावण हमारे साथ जिंदा रहता है ताउम्र , हम पर हँसते हुए अट्टहास करते हुए ..
और हाँ ' रावण अमर है क्योंकि रामायण देखते हुए हमने श्रीराम से बहुत कम सिखा परन्तु रावण से बहुत प्रभावित हुए'।
और हां रामायण की वो पंक्ति तो सुनी ही होगी आज ' अपनी हिम्मत ना हारे पुनि पुनि ललकारे ' बिल्कुल आज भी ललकार रहा है वो हमारे भीतर से हर रोज !! बड़ा ही जानलेवा है ये अहम होने का वहम भी , रावण मिट जायेगा परन्तु झुकेगा नही।
रावण मरकर भी कभी नही मरेगा उसका नाम उसकी कीर्ति के साथ जीवित रहेगा जीवित इसीलिए नही की उसने ऐसा कहा था वरन इसीलिए की हम उसे मरने नही देंगे कभी अपने कर्मो से।
श्रीराम ने तो वध कर दिया है रावण का त्रेतायुग में ही परन्तु रावण का अट्टहास अब भी जैसे दिमाग़ में घुम सा रहा है , अगर वो नारायण है तो उनका और मेरा नाम एक साथ लिया जायेगा और ये विश्व कीर्तिमान होगा ।
रावण अमर है !! शायद ये कथन सत्य था वरना हम आज भी हर साल रावण को जलाते नही , साल दर साल !! अब तो श्रीराम नही दिख रहे परन्तु रावण हर जगह है हमने रावण से परम ज्ञानी होना तो नही सीखा , भक्ति करना नही सीखा , अभिमान और अंहकार में फर्क नही सीखा ,जिंदादिल होकर बहादुरी से टक्कर लेना नही सीखा , हां पर झुठे अहंकर को जिंदा रखना सीख लिया , हरण करना सीख लिया , स्त्री अपमान करना सीख लिया , बिना किसी माया के छल करना सीख लिया ,लोगो का अपमान करना सीख लिया ।
मरण पश्चात हम ' श्री राम नाम सत्य है ' कहते हैं परन्तु रावण हमारे साथ जिंदा रहता है ताउम्र , हम पर हँसते हुए अट्टहास करते हुए ..
और हाँ ' रावण अमर है क्योंकि रामायण देखते हुए हमने श्रीराम से बहुत कम सिखा परन्तु रावण से बहुत प्रभावित हुए'।
और हां रामायण की वो पंक्ति तो सुनी ही होगी आज ' अपनी हिम्मत ना हारे पुनि पुनि ललकारे ' बिल्कुल आज भी ललकार रहा है वो हमारे भीतर से हर रोज !! बड़ा ही जानलेवा है ये अहम होने का वहम भी , रावण मिट जायेगा परन्तु झुकेगा नही।
रावण मरकर भी कभी नही मरेगा उसका नाम उसकी कीर्ति के साथ जीवित रहेगा जीवित इसीलिए नही की उसने ऐसा कहा था वरन इसीलिए की हम उसे मरने नही देंगे कभी अपने कर्मो से।

Well done utkarsh👍 keep going
ReplyDeleteThanks buddy 🤘
DeleteThis a theoretical way to understand ramayan ... Nicer onee
ReplyDeleteThanks bro 🙏🏻
DeleteThis is a theoretical way to understand ramayan...nicee one
ReplyDeleteNo doubt ....ravan Amar h ....pr jaise hm hr sal us ravan ko jalate h .....vaise hi hr dn khd ki ek negativity ko bhi apne se alg kre to sayad ramayan ka main motive Poora ho Jaye..... great Job Utkarsh🙂
ReplyDeleteThanks Ichchha
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